कुमाऊँनी लोकगीतों में पर्यावरणीय चेतना की अनुगूंज

Jyoti Tamta

Abstract


भारत वर्ष आस्थाओं और विश्वासो की संगमस्थलीय है। विश्व के किसी भी संस्कृति में इतने अधिक उत्सवो त्योहारों, मेलें, तीर्थो एवं स्नान पर्वो की व्यवस्था देखने को नहीं मिलती जितनी की भारत वर्ष में दिखाई पडती हैं। भारत संस्कृति प्राचीन काल से ही पर्यावरण हितैषी रही हैं, और आज भी लोेकगीतो के माध्यम से इसी परम्परा का निर्वाहन कर रहे है। कुमाऊँनी संस्कृति भी भारतीय संस्कृति का एक छोटा प्रतिरूप है। कुमाऊँनी लोक संस्कृति के गीतों में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों रूपो में अन्र्तनिहित है। यहाँ की प्रथाओ, परम्पराओं, रीति-रिवाजों, कलाओं, साहित्यों आदि विभिन्न क्षेत्रो मे प्यावरण के प्रति जागरूकता सहज दृष्टिगोचर होती है। उक्त शोध आलेख में कुमाऊँनी लोक संस्कृति के गीतो में पर्यावरण संरक्षण की महत्तर को प्रस्तुत किया गया है।


Keywords


सस्ंकृति, पर्यावरण, लोकगीत, प्रथाओं, साहित्य

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