उच्च शैक्षिक उपलब्धि एवं निम्न शैक्षिक उपलब्धि की छात्राओं में बुध्दि एवं रुचि का तुलनात्मक अध्ययन

Sangeeta Verma

Abstract


आधुनिक युग में शिक्षा बाल केन्द्रित है। बालक को शिक्षा प्रदान करते समय उसकी बुध्दि एवं रुचि का पूर्ण ध्यान रखा जाता है। ‘‘रुसो का कथन है कि शिक्षा अपना उद्देश्य, प्रक्रिया एवं अर्थ बालक के जीवन एवं अनुभव में ही ढूढ़ती है।‘‘
विदेशों में शिक्षा बालक की रुचि के अनुसार ही प्रदान की जाती है जो बालक जिस प्रकार की रुचि रखता है और जिस प्रकार का उसकी बुध्दि का स्तर होता है उसी प्रकार की शिक्षा उसे प्रदान की जाती है, इस प्रकार प्रदान की जाने वाली शिक्षा बालक को भविष्य में प्रदान की जाने वाली उच्च शिक्षा अथवा व्यवसायिक शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है, परन्तु अभी भारत वर्ष में इस प्रकार बुध्दि एवं रुचि के अनुसार शिक्षा प्रदान करने का अभाव है। यहाँ पर माता पिता अपने बालक को अपने अनुसार जैसी शिक्षा प्रदान करना चाहते है वैसी ही शिक्षा वह ग्रहण करने लगता है।
परन्तु इस प्रकार की शिक्षा जिसमें बालक की बुध्दि एवं रुचि का ध्यान, न रखा जाये, वह व्यर्थ है, क्योंकि यदि एक बालक को यद्यपि वह बुध्दिमान है परन्तु उसे विज्ञान पढ़ने में रुचि नहीं है तो वह विज्ञान जैसे जटिल विषय में श्रेष्ठता प्राप्त नहीं कर सकता यदि उसने किसी प्रकार समायोजन कर भी लिया तो उसे उच्च स्तर पर सफलता नहीं प्राप्त हो सकेगी।
अतः शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार का अध्ययन आवश्यक है कि बुध्दि एवं रुचि का शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव पड़ता है तथा सामाजिक स्तर एवं परिस्थितियों का प्रभाव भी बुध्दि एवं रुचि के सम्बन्धों पर पड़ता है। इस अध्ययन से अध्यापकों को भी सहायता मिलती है।


Keywords


बुद्धि, रुचि, शैक्षिक उपलब्धि, शिक्षा, छात्राएं, उच्च, निम्न

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References


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