विदेशी यात्रियों के यात्रा-विवरणों में जाति-व्यवस्था

बृज किशोर वशिष्ट

Abstract


सदियों से भारत विश्व के आकर्षण का केंद्र रहा है। हर काल में इस महादेश की सीमाओं को लांघते हुए अनेक यात्री यहाँ आते रहे हैं। परिवहन के प्राचीन और मध्यकालीन साधनों से जब कोई अनेक कष्टों को सहन करते हुए यहाँ आया होगा तो उसके ऐसा करने के पीछे कोई न कोई खास कारण अवश्य रहा होगा। किसी यात्री के यहाँ आने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य था तो किसी के पास धार्मिक, कोई अपनी यायावरी के कारण यहाँ तक पहुँच गया था तो कोई धन के लालच में यहाँ आया था और कुछ ऐसे भी यात्री इस देश में पहुँचे जिन्हें उनकी ज्ञान पिपासा यहाँ खींच लाई थी। इनके यात्रा वृतांतों के अध्ययन से हम जाति-वर्ण-व्यवस्था के ऐतिहासिक विकास क्रम को समझ सकते हैं। भिन्न-भिन्न देशों, धर्मों और नस्लों के लोगों की नज़र में भारत की जाति-वर्ण-व्यवस्था के  रूढ़िबद्ध होते जाने को आसानी से रेखांकित किया जा सकता है।

Keywords


मेगस्थनीज, फ़ाहियान, अल बिरूनी, बर्नियर, जाति

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References


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