शिक्षा-वस्तु का समीक्षात्मक अध्ययन और समाधानात्मक विकल्प की पहचान

सुरेन्द्र पाठक

Abstract


शिक्षा के दर्शनों के विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि यह मूल रूप से आदर्शवाद और भौतिक्वाद पर केन्द्रित रही है। आदर्शवाद रहस्यमूलक और आस्था अवं मान्यताओं पर  केन्द्रित होने के कारण  यह अतार्किकता में फस गया वही दूसरी ओर आदर्शवाद की मान्यताओं प्रतिपुस्टी नहीं की जा सकती है और न ही किसी विधि से इसकी सत्यता की जांच की जा सकती  है।

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